Oct 31, 2018

Diwali festival क्यों मनाया जाता है | दीपावली कब है | दिवाली इतिहास और महत्त्व



Deepawali का त्योहार भारत में बनाया जाने वाला सबसे popular festival में से एक है. यह tyohaar हिंदुओं का सबसे बड़े त्यौहारो में से एक है. जिसे लोग आस्था का प्रतीक, बुराई पर अच्छाई की जीत, सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन उन्नति, जश्न और उत्सव के रूप में मनाते हैं. भारत के अलग-अलग राज्यों में इसे बनाने का तरीका और कारण अलग अलग है. हिन्दुओ के अलावा दिवाली का पर्व सिख, जैन, और बौद्ध धर्म के लोग भी धूमधाम से मनाते हैं.

Indian hindu festival


Deepawali festival india में ही नहीं बल्कि india के बाहर के विभिन्न देशों में बसे भारतीय द्वारा भी मनाई जाती है जैसे नेपाल श्रीलंका मलेशिया सिंगापुर ऑस्ट्रेलिया ब्रिटेन न्यूजीलैंड पाकिस्तान यूके यूएस इत्यादि. भारत में दिवाली का पर्व हर साल अक्टूबर या नवंबर के माह में मनाया जाता है. तो आज हम आपको दीपावली त्यौहार से related कुछ जानकारियां लेकर आये है. Jaise diwali kyu manaya jata hai/ deepawali manane ki dharmik katha/ diwali kab hai/ diwali date 2018/ why is the festival of diwali celebrated.


दिवाली क्या है - diwali kya hai

दिवाली या दीपावली जिसे कई नामों से जाना जाता है. इसे दीपोत्सव भी कहा जाता है. यह आस्था और उल्लास का पर्व है जिसे कई करनो से मनाया जाता है. जैसे भगवान के प्रति आस्था के लिए, बुराई पर अच्छाई की जीत के लिए, अंधकार को दूर कर प्रकाश के आगमन के लिए, सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन के लिए, तो ऐसे कई कारण हैं जिनसे दिवाली मनाने की प्रथा चली आ रही है.

ये भी पढ़े :-


दीपावली कैसे मनाया जाता है | deepawali kaise manaya jata hai

भारत में दीपावली मनाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है जो समय के साथ-साथ इसे मनाने की प्रक्रिया भी बदलती जा रही है. भारत के अलग-अलग जगहों में इसे अपने ढंग से बनाया जाता है. दीपावली मुख्य रूप से 5 दिन तक चलता है पहला दिन - धनतेरस, दूसरा दिन - नरक चतुर्दशी, तीसरा दिन - लक्ष्मी पूजा (दिवाली), चौथा दिन - गोवर्धन पूजा और पांचवा दिन - भाई दूज. दीपावली के इन पांच दिन का अपना महत्व है जिसे देशभर में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है.


मुख्य रूप से दिवाली में लोग अपने घरों की साफ-सफाई कर लिपाई-पुताई करते हैं. नए कपड़े गहने और विभिन्न प्रकार के सामान की खरीदारी करते हैं. लोग अपने सगे संबंधियों के घर जाकर उन्हें दिवाली की शुभकामनाएं और मिठाइयां और gift,उपहार देते हैं. इस दिन लोग अपने घरों में मिट्टी के दिए और मोमबत्ती जलाकर अपने घर को रोशन करते हैं. साथ ही घर के आंगन में रंगोली बनाते हैं. दीवाली के तीसरे दिन यानि लक्षमी पूजा के दिन लोग अपने घरो माँ लक्षमी की पूजा के साथ अपने धन संपत्ति की पूजा कर माता से सुख समृद्धि का आशीर्वाद लेते है. इस दिन लोग घरों में तरह तरह की मिठाई और पकवान बनाकर celebrate करते हैं. इन सभी चीजों के अलावा दिवाली की पूरे दिन पटाखे की धूम रहती है. विभिन्न प्रकार के पटाखे फोड़कर लोग आनंद मई दिवाली मनाते हैं. दीपावली के पुरे दिन हर तरफ, हर कोना यहाँ तक की पूरा देश पटाखों की गूंज से भर जाता है. तो देखा जाए तो दिवाली का त्योहार अपनी तरफ से ढेरों खुशियां और उमंग लेकर आता है.

दीपावली क्यों मनाया जाता है? दिवाली मनाने की प्रमुख कारण


दिवाली मनाने के पीछे कई कारण है जिनके पीछे धार्मिक और ऐतिहासिक कथाएं और परंपराएं चली आ रही है तो आगे हम आपको दिवाली क्यों मनाया जाता है कि प्रमुख कारणों के बारे में बता रहे हैं.

#1 भगवान राम द्वारा बुराई पर अच्छाई की जीत और उनके आगमन के लिए.


दीपावली मनाने के पीछे जो सबसे बड़ी और प्रचलित धार्मिक और पौराणिक कथा है. जिसमें भगवान राम द्वारा रावण के वध और उनके विजय आगमन के लिए दिवाली मनाने की परंपरा चली आ रही है. माना जाता है बहुत समय पहले अयोध्या के राजा दशरथ की तीन पत्नियां थी जिनसे उन्हें 4 पुत्र हुए थे. जिनमें राम सबसे बड़ा था राजा दशरथ को उनकी पत्नी को दिए हुए वचन के अनुसार. जो कि उनकी पत्नी कैकई मंथरा के बहकावे में आकर राम को 14 वर्ष का वनवास और उनके बेटे भरत को अयोध्या का राजकुमार बनाने की मांग करते है.

इस तरह राजा दशरथ अपने दिये हुए वचन को निभाते हुए राम को 14 वर्ष के लिए बनवास और भरत को अयोध्या का सिंहासन देने की घोसना करते हैं. इस तरह राम के साथ उनकी पत्नी सीता और छोटे भाई लक्ष्मण भी जाते हैं. जब राम 14 वर्ष के वनवास जंगलों में काट रहे होते है इस बीच लंका के राजा रावण की बहन शूर्पणखा लक्ष्मण को अपने रूप रंग से लुभाने का प्रयास करती है. जिसमे वह असफल रहती है. तब वह सीता को मारने का प्रयास किया यह देख लक्ष्मण सूर्पनखा की नाक काट देते हैं. 

तो इस घटना को सूर्पनखा अपने भाई रावण को बताते हैं जिससे रावण गुस्से में आकर माता सीता को उनके कुटिया से उठाकर लंका ले जाते हैं. तब राम रावण को सीता को वापस करने के लिए कई बार चेतावनी देते हैं कि वह अपनी गलती स्वीकार कर अपनी भूल की छमा मांगे और सीता को सही सलामत छोड़ दे. लेकिन रावण अहंकारी राजा था जिन्हें कई शक्तियां प्राप्त थी. जिसके बाल पर वह घमंड करते हुए सीता को ना देने और उनसे विवाह करने की बात करते हैं. और अपने बहन सूर्पनखा के हुए अपमान का बदला लेने की बात करते हैं. इस तरह भगवान राम के द्वारा अथक प्रयास के बावजूद ना मानने पर दोनों के बीच एक भयंकर युद्ध छिड़ जाता है.

जिसमें आखिरकार प्रभु राम द्वारा रावण का वध होता है और बुराई पर अच्छाई की जीत होती है. जब राम लंका से विजई होकर लौटते हैं. तो पूरे अयोध्यावासी इस खुशी में दीप जलाकर उनके स्वागत करते हैं. इस दिन पुरा आयोध्या दीपो से जगमगा उठता है. इस तरह प्रतिवर्ष दशहरे के पर्व के 18 दिन बाद दीपावली का त्यौहार मनाने की प्रथा चली आ रही है.

#2 भगवान श्री कृष्ण द्वारा नरकासुर का वध


पौराणिक कथाओं के अनुसार बहुत समय पहले नरकासुर नामक एक दैत्य राक्षस राजा था. जो अपनी दैत्य शक्तियों के बल पर लोगों पर अत्याचार करता था. और उसने अपनी कारागार में करीब 16000 औरतों को बंदी बना रखा था नरकासुर के अत्याचार को समाप्त करने के लिए भगवान श्री कृष्ण उनका अत्याचार को खत्म कर उनका वध कर सभी महिलाओं को उनके चंगुल से छुड़ाते हैं. इस तरह दिवाली के 1 दिन पहले भगवान श्री कृष्ण द्वारा नरकासुर के वध के लिए नरक चतुर्दशी का त्यौहार मनाते हैं.


#3 मां लक्ष्मी के जन्मदिन के रूप में दिवाली मनाने की प्रथा


माना जाता है कि एक बार समुद्र मंथन जिसमें कई देवताओं और राक्षसों के बीच किया जाता है. इस मंथन में कई अद्भुत चीजें निकलती है. इसी समुद्र मंथन के द्वारा मा लक्ष्मी कार्तिक महीने की अमावस्या को ब्रह्मांड में आई थी. इस तरह उनके जन्मदिन के रूप में दिवाली का त्यौहार मनाना आरम्भ हुआ कहा जाता है देवी लक्ष्मी धन संपत्ति और समृद्धि की देवी है. इस तरह दिवाली के तीसरे दिन मां लक्ष्मी की पूजा विधि विधान से किया जाता है. इस दिन लोग अपनी धन संपत्ति की भी पूजा करते है.


2018 में diwali festival कब मनाया जाएगा -
Deepawali festival date 2018

दीपावली का त्यौहार हर साल अक्टूबर या नवंबर के माह में मनाया जाता है. इसके तिथि और दिन में परिवर्तन होता रहता है. 2018 में दिवाली फेस्टिवल नवंबर के शुरूआत में मनाया जाएगा जो इस प्रकार से है.

  1. धनतेरस (dhanteras) - सोमवार - 5 november - 2018
  2. नरक चतुर्दशी (narak chaturdashi) - मंगलवार - 6 november - 2018
  3. लक्षमी पूजा (laxmi puja) - बुधवार - 7 november - 2018
  4. गोवर्धन पूजा (govardhan puja) - गुरुवार - 8 november - 2018
  5. भाई दूज (bhai duj) - शुक्रवार - 9 november - 2018

तो दोस्तों हमें आशा है आज के इस diwali festival से जुडी हुई जानकारी आपको पसन्द आई होगी. webtohindi.com की तरफ से आप सभी को दीवाली की हार्दिक बधाई. | HAPPY DEEPAWALI |


EmoticonEmoticon