Shri krishna janmashtami क्यों मनाया जाता है | janmashtami festival history hindi

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जन्माष्टमी उत्सव अर्थात भगवान श्री कृष्ण के जन्म दिन के रूप में मनाया जाने वाला भारत के विभिन्न त्योहारों में से एक है. janmashtami festival पूरे india में प्रतिवर्ष हर्षोल्लास व धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन लोग श्री कृष्ण की पूजा,व्रत,दही हाँडी/मटकी फोड़ प्रतियोगिता का आयोजन करते हैं. यह दिन मथुरा वासियों के लिए सबसे खास दिन होता है. जिसे मथुरा वासी बेसब्री से इंतजार करते हैं.

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क्योंकि भारत के मथुरा में ही भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था. और यहीं से जन्माष्टमी मनाने का आरंभ सबसे पहले हुआ था. जन्माष्टमी के दिन मथुरा में भव्य मटकी फोड़/दही हांडी का आयोजन किया जाता है. जिसे देखने के लिए पुरे भारत और india के बाहर निवास करने वाले भारतीय देखने के लिए आते हैं. वैसे तो जन्माष्टमी का त्योहार भारत में जोर शोर से मनाया जाता है. इसके अलावा इंडिया के बाहर नेपाल और दूसरे देशों में बसे भारतीय इस दिन को celebrate करते हैं.


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भारत शुरू से ही देवी देवताओं की जन्मस्थली माना जाता है. जहां विभिन्न प्रकार के धर्म को मानने वाले लोग निवास करते हैं. भारत में हर साल सैकड़ों त्योहार मनाई जाती है और उन त्यौहारों के पीछे आस्था और देवी देवताओं की लीलाएं जुड़ी होती है. जो इस बात को बताती है कि आज हम जो त्यौहार मनाते हैं वह केवल त्यौहार नहीं होता बल्कि एक आस्था और सच्चाई का प्रतीक होता है. जिसे हम पूजते हैं और पर्व मनाते हैं. जन्माष्टमी भी उन्हीं में से एक है जो भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा किए गए कार्यों को उजागर करती है जो आज हम आपको यहाँ बता रहे हैं.


जन्माष्टमी का त्योहार क्यूँ मनाया जाता है.

Why is krishna janmashtami celebrated


पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान विष्णु ने इस धरती को पापियों के अत्याचार से बचाने के लिए देवकी और वासुदेव के आठवें पुत्र के रूप में धरती पर जन्म लिया. श्री कृष्ण के मामा कंस को एक आकाशवाणी के द्वारा श्राप मिला था कि उनका वध देवकी और वासुदेव के आठवीं संतान करेगी. कंस मथुरा का अहंकारी राजा था जो लोगों पर अत्याचार करता था. उसका यह अत्याचार दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा था. जब आकाशवाणी के द्वारा कंस को अपनी मृत्यु का कारण पता चला कि उसकी बहन देवकी के आठवें पुत्र ही उसका वध करेगा. तब कंस अपनी बहन को भी मारना चाहा लेकिन उनके बहन की पति वासुदेव के समझाने पर उसे छोड़ दिया कि जब उनकी आठवीं पुत्र जन्म लेगी तो उसे आपके हाथों सौंप देंगे. 
इस तरह उस दिन तो वह अपनी बहन को छोड़ दिया लेकिन उन्हें कारागार में बंद कर दिया गया समय बीतता गया और देवकी वासुदेव के संतान जन्म लेते गए जिन्हें कंस एक-एक करके मारता गया. अब वह समय आने वाला था जब उन की आठवीं संतान यानी कि भगवान श्री कृष्ण जन्म लेने वाले थे.

आखिरकार कृष्ण ने जन्म लिया और स्वयं भगवान के रूप में वहां प्रकट हुए और वासुदेव से कहा कि जो आप की आठवीं संतान हुई है वह मैं हूं और उनसे कहा कि आप इस बालक को अपने मित्र नंदजी के घर छोड़ आओ और वासुदेव इस तरह उस बालक को ले कर जाने लगे. जब वह नन्हे कृष्ण को एक टोकरे में ले जाने लगे तब वासुदेव के शरीर में बंधे जंजीर खुल गए और कारागार के दरवाजे भी अपने आप खुल गए और महल के सिपाही भी निद्रा में सो गए.

 जब वासुदेव नदी पार कर रहे थे तब नदी भी छोटी पड़ गई और उन्हें रास्ता देने लगी. इस तरह वासुदेव कृष्णा को अपने मित्र नंद जी के घर जन्मे बालिका से बदलते हुए उस कन्या को बंदीगृह ले आए. और कृष्ण को यसोदा के पास छोड़ आये. जब कंस को यह बात पता चली कि आठवीं पुत्र ने जन्म ले लिया है. तब उसे मारने कंस कारागार जाता है.

जैसे ही कंस कन्या शिशु को मारने वाला होता है तभी वह कन्या अपने रूप में आ जाती है. क्योंकि वह भी भगवान का एक रुप होती है जो कंस को बताती है कि तुझे मारने वाला सुरक्षित वृंदावन पहुंच गया है. और इस तरह वह देवी अदृश्य हो जाती है. फिर कंस कृष्ण को मारने के लिए अनेक प्रयास करते है. जिसमें वह हर बार विफल होता है आखिर वह समय आता है जब कृष्ण के हाथों कसं मारा जाता है और उसके अत्याचार से नगरवासी मुक्त हो जाते हैं.
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इस तरह भगवान श्री कृष्ण ने कंस को मार कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संकेत लोगों को दिया. यही नहीं वह कृष्ण अवतार में कई लीलाएं कि महाभारत के युद्ध में भी उनका मुख्य योगदान था. श्री कृष्ण जब छोटे थे तब वह बहुत नटखट थे वह दही खाने के शौकीन थे जो ना मिलने पर चुरा कर खा लिया करते थे. दही चुराने के लिए वह रस्सी से बंधे हुए मटकी में से दही निकालने के लिए अपने मित्रों के द्वारा पिरामिड बना कर दही चुराया करते थे. जिसके कारण ही आज दही हांडी /मटकी फोड़ का आयोजन किया जाता है.

तो इस तरह भगवान श्री कृष्ण के मथुरा में जन्म लेने और कंस को मारने तथा उनकी लीलाओं के लिए जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है.


2018 में कृष्ण जन्माष्टमी कब मनाया जाएगा

इस साल 2018 में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2 और 3 सितंबर को धूमधाम से पूरे देश भर में मनाया जाएगा.

आशा है आज की हमारी यह लेख श्री कृष्ण जन्माष्टमी क्यों मनाया जाता है कि जानकारी आपको अच्छा लगा हो तो आप इसे अपने दोस्तों के साथ social media पर share जरूर करें.

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