Feb 27, 2018

होली क्यों मनाया जाता है history of holi festival in hindi

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Hello friends आने वाले holi के त्यौहार की आप सभी प्रिय readers को हमारे तरफ से अग्रिम बधाई. happy holi in advance आज के इस पोस्ट में हम आपको बताएँगे india ke sabse bade tyohaar me se ek holi ke bare me. Jaha aap janenge holi manane ka karan. holi ka mahatva. holi ka itihas. holi kab aur kaha manayi jati hai. holi kab hai. holi ke bare me puri jankari.

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होली भारत में मनाई जाने वाली most popular त्यौहारो में से एक है. जो प्रतिवर्ष हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. यह festival रंग गुलाल, प्रेम भाव और आस्था का प्रतीक है. जिसे भारत में हर उम्र के तथा सभी धर्म के लोग आपस में मिलकर भाईचारे के रूप में मनाते हैं. india में होली के त्यौहार का सभी को बेसब्री से इंतजार रहता है जिसका लोग बहुत ही धूमधाम नाच गाने और विभिन्न तरह के पकवान बनाकर मनाते हैं. यह दिन बहुत ही खास होता है जो लोगों के जीवन में एक नया रंग लेकर आता है. भारत देश में जितने भी त्यौहार मनाई जाती है उन सब के पीछे कुछ ना कुछ इतिहास जरूर होती है. जो बुराई पर अच्छाई की जीत और धार्मिक परंपराओं को उजागर करती है. तो होली भी उन्ही में से एक है जिसके बारे में हम आपको यहां बता रहे हैं.


होली क्यों मनाया जाता है होली की कहानी.
होली का त्योहार मुख्य रूप से हिंदू धर्म के लोगों का त्यौहार है. और hindu festival में लगभग हर tyohaar के पीछे देवी धर्म और आस्था होती है. तो वहीं होली में भी ऐसा ही कुछ वर्णन मिलता है वैसे तो होली मनाने के पीछे कई कहानियां है. जिसमें सबसे प्रचलित कहानी एक बालक और उसका भगवान के प्रति सच्ची श्रद्धा भक्ति की है. यह पौराणिक कहानी उस समय की है. जब दुनिया में भगवान की महिमा और लीलाएं हुआ करती थी. और उनही बीच कुछ ऐसे भी व्यक्ति होते थे जो अपने कड़ी मेहनत तपजप और श्रद्धा से भगवान को खुश करके तथा उन्हें किसी न किसी तरह वरदान देने पर मजबूर कर देते थे. तब भगवान उनकी यह कड़ी तपस्या को देखकर उन्हें मांगे गई शक्ति या वरदान दे देते थे लेकिन उनमें से कुछ लोग अपनी वरदान का गलत इस्तेमाल करते हैं. जिन्हें दैत्य यह आशूर भी कहते हैं. तो यह कहानी है हिरणकश्यप राजा और उसके पुत्र भक्त प्रहलाद की हिरणकश्यप बहुत ही घमंडी अहंकारी राजा जो एक असुर की तरह था.

हिरन्यकश्यप का एक छोटा भाई जो भगवान विष्णु के हाथों मारा जाता है. जिसकी मौत का बदला लेने के लिए हिरणकश्यप कई सालों तक भगवान ब्रह्मा की प्रार्थना करता है. और आखिर भगवान ब्रह्मा उन्हें वह वरदान दे देते हैं. जिसके बाद हिरण्यकश्यप अत्यंत बलशाली हो जाता है और उसका घमंड इतना बढ़ जाता है कि. वह अपने आप को भगवान मानने लगता है. और अपने राज्य में सभी लोगों को अपनी पूजा करने का आदेश देता है. और उसकी जगह कोई भगवान विष्णु की पूजा करता तो उसे दंड भी देता था. लोग उसके इस अत्याचार को देखते हुए उसकी पूजा करने पर विवश हो गए थे. वही उनका पुत्र प्रहलाद उनकी इस आदेश को नहीं मानता था वह जन्म से ही भगवान विष्णु की श्रद्धा भक्ति करता आ रहा था. वह एक राक्षस का पुत्र होने के बावजूद भी भगवान की पूजा पाठ और अच्छाई में विश्वास रखता था. प्रहलाद भगवान विष्णु का का सच्चा भक्त था.


उनकी इस भक्ति और अपनी जगह भगवान विष्णु की पूजा करते देख हिरण्यकश्यप अपने बेटे प्रह्लाद से बहुत क्रोधित थे. और उसे मरवाने की बहुत बार कोशिश करता है पर हर बार वे विफल रहते हैं. क्योंकि उसकी रक्षा भगवान विष्णु करते थे. आखिर एक दिन हिरण्यकश्यप अपने ही बहन जिसका नाम होलिका थी उसी के हाथो अपने पुत्र को मरवाना चाहता था. होलिका को भगवान शिव द्वारा वरदान प्राप्त था जिसमें वह आग में नहीं जल सकती थी. जो राजा को पता होता है और इसी के चलते राजा एक योजना बनाता है. जिसमे वह होलिका को कहता है कि वह प्रहलाद को गोद में लेकर आग में बैठ जाए. लेकिन उनकी यह योजना सफल नहीं हो सकी क्योंकि प्रह्लाद अपने प्रभु की भक्ति में लीन होते हैं जिसकी वजह से आग उसे छू भी नहीं सकी. वही होलिका उसी आग में जलकर भस्म हो जाती है

जिसमें उनका आग में न जलने का वरदान भी काम नहीं आता और वह अपने ही बनाए हुए जाल में फंस जाती है. और वहीं उनकी मृत्यु हो जाती है इसके बाद हिरण्यकश्यप को भी भगवान विष्णु सामने आ कर वध कर देते हैं. इस तरह होलिका का आग में जलकर मरने और बुराई पर अच्छाई की जीत की वजह से ही भारत में होली मनाने के 1 दिन पहले होलिका दहन किया जाता है. होलिका दहन के दिन लोग लकड़ी के ढेर को जलाकर इस दिन अपने अंदर की बुराई को मिटाने का और अच्छे कर्म करने का संकल्प लेते हैं.

होली कब और कहां मनाया जाता है

Holi को फगुआ,धुलेंडी, तथा दोल के नाम से भी जाना जाता है. जो प्रमुख रूप से भारत और नेपाल में मनाया जाता है. इसके अलावा भारत के लोग जो विदेशों में जाकर रह रहे हैं वह भी होली को धूमधाम से मनाते हैं. होली का पर्व वसंत ऋतु में फाल्गुन मास जो कि प्रतिवर्ष फरवरी या मार्च के महीने में आता है. होली मुख्य रूप से 2 दिन का होता है पहला दिन होलीका जिसमें बुराई पर अच्छाई की जीत के लिए लकड़ी के ढेर को जलाकर मनाते हैं. दूसरा दिन होता है होली का जिसमें लोग एक दूसरे को रंग गुलाल लगाकर संगीत नाच गाना और विभिन्न प्रकार के खाना पकवान बनाकर इस त्यौहार को अत्यंत हर्ष उल्लास के साथ मनाते हैं.

होली सही तरीके से कैसे मनाएं holi kaise manaye


होली एक भाईचारे का प्रतीक और आपसे प्यार और स्नेह का त्यौहार है. इसके साथ यह festival बुराई पर अच्छाई की जीत को भी दर्शाता है. वैसे तो पूरे भारत में लोग अपने तरीके से होली मनाते हैं लेकिन जो हमारे पुराने लोग हैं वह पुरानी परंपरा और नियम के साथ मनाते हैं. जो यहां हम आपको बता रहे हैं.


  1.  पहला दिन होलीका दहन होता है. इस दिन लोग समूह में इकठ्ठा होकर लकड़ी,घास,गाय के गोबर के कंडे को जलाकर बुराई पर अच्छाई की जीत को याद कर अपने अंदर की बुराई को भी मिटने का भी संकल्प लेते हैं.
  2. होलिका दहन के दिन अगर आप भी अपने जीवन में कोई बुरा काम किए हैं. या अपने अंदर की बुराई को छोड़ना चाहते हैं तो उस दिन आप भी संकल्प ले सकते हैं.
  3. दूसरा दिन होता है होली का यह दिन प्यार और स्नेह का होता है. इस दिन हम अपने से बड़ों का सम्मान कर उन्हें रंग लगाना और अपने दुश्मन को भी गले लगा कर और अपनी पुरानी दुश्मनी और कटुता को भुलाकर उन्हें इस त्योहार की बधाई और रंग गुलाल लगाते हैं.
  4. होली के दिन आप अलग-अलग तरह के मिठाई व्यंजन बनाकर तथा अपने किसी रिश्तेदार या आस-पास के लोगों को खाने के दावत भी दे सकते हैं. 
  5.  इस दिन आप naturals colors का उपयोग करें. chemical से बने रंगों का इस्तेमाल ना करें यह स्किन के लिए हानिकारक होता है.
  6. Holi colors का सही तरीके से उपयोग करें इसे किसी के आंख ,कान ,नाक पर ना डालें केवल चेहरे पर लगाएं.
  7.  होली के दिन नशीले पदार्थ का सेवन करके होली न खेले सुखी और साफ-सुथरी होली खेले.

To friends i hope yah post holi ki jankari aapko jarur pasand aaya hoga. To ise apne dosto ke sath bhi share kare. and holi ki aap sabhi ko hardik badhai.


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